वेनेज़ुएला का इतिहास : अतीत, राजनीति और वर्तमान संकट की पूरी कहानी
दक्षिण अमेरिका का एक महत्वपूर्ण देश - वेनेजुएला, जो अपने विशाल तेल भंडार, और लंबे ऐतिहासिक संघर्षों के कारण दुनिया भर में चर्चा का केंद्र रहा है | आधुनिक समय में वेनेजुएला अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है |
इस लेख में वेनेजुएला की भौगोलिक स्थिति, प्राचीन मानव सभ्यता, उपनिवेशवाद, स्वतंत्रता आंदोलन, तेल पर आश्रित अर्थव्यवस्था और वर्तमान हालात को विस्तृत रूप से प्रस्तुत किया गया है |
वेनेज़ुएला : एक नज़र में
स्थिति - दक्षिण अमेरिका के उत्तर - पश्चिम में
राजधानी - कराकास
आधिकारिक नाम - बोलिवेरियन रिपब्लिक ऑफ वेनेजुएला
आधिकारिक भाषा - स्पेनिश
मुद्रा - वेनेजुएला बोलिवर
क्षेत्रफल - 916, 445 वर्ग कि.मी (33वां सबसे बड़ा देश)
भूमि क्षेत्र - 882, 050 वर्ग कि.मी
राष्ट्रपति - निकोलस मादुरो
जनसंख्या - 31, 889, 227 निवासी
उत्तर में - कैरीबियन सागर और अटलांटिक महासागर
दक्षिण में - ब्राज़ील
पूरब में - गुयाना
पश्चिम में - कोलंबिया
विशाल मैदान - लानोस
ऊँचा जलप्रपात - एंजेल फॉल्स 979 मीटर (विश्व में सबसे ऊँचा जलप्रपात)
धर्म - रोमन कैथोलिक
वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका के उत्तर में स्थित एक सुन्दर और महत्वपूर्ण देश, कैरीबियन सागर के तट पर स्थित है | इस देश को विश्व के सबसे बड़े तेल भंडारों में गिना जाता है | देश के उत्तर - पश्चिम भाग में एंडीज पर्वत है, जहाँ मौसम ठंडा रहता है और ये जमीन खेती के लिए अच्छी मानी जाती है | इसके उत्तर में स्थित कैरीबियन सागर, जो ऐतिहासिक रूप से समुद्री व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय संपर्कों का एक उत्तम साधन है और पश्चिम में कोलंबिया के साथ इसकी लंबी सीमा है |
दक्षिण में ब्राज़ील और पूर्व में गुयाना के साथ इसकी सीमाएँ लगती हैं जिससे इसका विस्तार अमेज़न क्षेत्र और महाद्वीप के आतंरिक हिस्सों तक है और इसीलिए वेनेजुएला को दक्षिण अमेरिका और कैरीबियन देशों के बीच का पुल माना जाता है |
इसके दक्षिण भाग में एक बहुत बड़े घास लानोस का मैदान है, जो पशुपालन के लिए मशहूर है | ये मैदान ग्रामीण संस्कृति का आधार है क्योंकि यहाँ के ग्रामीण निवासी पशुपालन से ही अपना जीवन यापन करते हैं | दक्षिणी वेनेजुएला में स्थित एंजेल फॉल्स के आलावा घने जंगल, पठार और कई आदिवासी समुदाय भी रहते हैं |
अगर संसाधनों की बात करें तो वेनेजुएला तेल के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है | इसी तेल पर अपना वर्चस्व पाने की होड़ में आज दुनिया के कई देश दोस्ती से दुश्मनी तक पहुँच चुके हैं हालाँकि तेल के विशाल भंडार से लंबे समय तक देश की आर्थिक हालत अच्छी रही लेकिन तेल पर अधिक निर्भरता आगे चलकर देश के लिए मुसीबत साबित हुई |
वेनेजुएला का इतिहास
वेनेज़ुएला का इतिहास खानाबदोश और कबीलों से शुरू होता है जिसमें शिकारी और मछुआरे भी शामिल थे | यूरोपियों के आने से पहले वेनेजुएला में कई आदिवासी जनजातियाँ निवास करती थी - इनमें कारिब, अरावाक और टिमोटो - कुइकस जैसी प्रमुख जनजातियाँ थी और ये सभी शिकार, खेती और मछली पकड़ने पर निर्भर थे | एंडीज पहाड़ों में रहने वाली जनजातियाँ उस समय की अन्य जनजातियों से अधिक विकसित थी |
वे पहाड़ी ढलानों पर सीढ़ीनुमा खेत बनाकर कृषि करते थे जिससे पानी और जमीन दोनों का सही इस्तेमाल होता था | ये लोग मिट्टी के बर्तन और औजार खुद ही बनाते थे और एक दूसरे की मदद करते थे इसलिए इनका जीवन एक समुदाय के रूप में व्यतीत होता था | उस समय कोई बड़ी सरकार या शासन व्यवस्था नहीं थी ऐसा माना जाता है कि हर समुदाय का एक मुखिया होता था जो लोगों से जुड़े फैसले लेता था |
इनके जीवन का आधार प्रकृति थी लेकिन यहाँ के लोगों और प्रकृति के बीच संतुलन की एक कड़ी थी | प्रकृति को किसी भी तरह से क्षति न पहुँचे इसलिए वो उतना ही लेते, जितनी उनको ज़रुरत होती थी | ये संतुलन तब टूटा जब यूरोपियों का आगमन हुआ | उपनिवेशवाद ने इन जनजातियों की ज़मीन छीन ली और उनकी सामुदायिक व्यवस्था टूट गई |
यूरोपियों का आगमन और स्पेनिश राज
क्रिस्टोफर कोलंबस साल 1498 में वेनेजुएला के तट पर पहुँचने वाला पहला यूरोपीय था | अपनी तीसरी यात्रा के दौरान दक्षिण अमेरिका आया और उसने इस नई ज़मीन को यूरोप के सामने प्रस्तुत किया | इसके ठीक एक साल बाद 1499 में अमेरिगो वेस्पूची (एक खोजकर्ता और नाविक) यहाँ आया, उसने पानी के ऊपर लकड़ी के बने कुछ घर देखे जो उसे इटली के वेनिस शहर जैसे लगे | इसी कारण उसने इस जगह को वेनेजुएला यानी छोटा वेनिस नाम दिया |
उस समय वेनेजुएला स्पेनिश शासन के अधीनस्थ ग्रान कोलंबिया का हिस्सा था | ग्रान कोलंबिया कोलंबिया, पनामा, इक्वाडोर और वेनेजुएला का एक संघ था | 16वीं शताब्दी में स्पेन ने वेनेजुएला पर अपना अधिकार जाताना शुरू किया और 1522 तक उसने वेनेजुएला को अपना उपनिवेश बना लिया |
स्पेनिश शासन के दौरान यहाँ एनकोमिएंडा प्रणाली लागू हुई जिसमें आदिवासियों से बाध्य श्रम कराया जाता था | इस समय यूरोप से आई बीमारियों और शोषण के कारण बहुत से आदिवासियों को अपनी जान गंवानी पड़ी | इसके बाद जबरन श्रम के लिए अफ्रीकी लोगों को लाया गया क्योंकि श्रम की कमी होने लगी थी जिससे वेनेज़ुएला की संस्कृति पर गहरा प्रभाव पड़ा |
स्पेनिश दौर में वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था कोको, कॉफ़ी और गन्ने की खेती पर आश्रित थी | उस समय समाज तीन वर्गों में विभाजित था, पहला - स्पेन में जन्मे शासक, दूसरा - क्रियोलो (बड़े जमींदार होते थे) और तीसरा - आदिवासी और अफ्रीकी लोग, जो शोषण झेल रहे थे | ये असमानता चरम पर पहुँच गई और आगे चलकर यही वेनेजुएला के स्वतंत्रता संग्राम का कारण बना |
19वीं सदी की शुरुआत में वेनेजुएला में आजादी की मांग शुरु हुई | सिमोन बोलिवर (वेनेजुएला के सैन्य और राजनीतिक नेता) जिन्हें एल लिबरेटाडोर कहा जाता है, ने स्पेन के खिलाफ स्वतंत्रता आन्दोलन का संचालन किया | एक लंबे संघर्ष के बाद वेनेजुएला ने 5 जुलाई, 1811 को अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की |
फिर भी युद्ध जारी रहा, परिणामस्वरूप, 24 जून, 1821 में हुए काराबोबो के युद्ध में बोलिवार की सेना ने स्पेश सेनाओं को हराकर स्पेन राज समाप्त कर दिया और 1830 में ग्रान कोलोंबिया भी टूट गया | आखिरकार कोलंबिया, पनामा, इक्वाडोर अलग - अलग स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित हुए | इसी के साथ वेनेज़ुएला भी एक स्वतंत्र देश के रूप में विश्व पटल पर उभरा |
वेनेजुएला आजादी के बाद भी राजनीतिक अस्थिरता
स्वतंत्र होने के बाद भी वेनेज़ुएला स्थिर लोकतंत्र की नींव नहीं रख पाया | देश लगातार तानाशाह और गृहयुद्धों के जाल में फंसता जा रहा था | इसकी सत्ता कौडिलो नामक एक शक्तिशाली जनरल के हाथ में थी बावजूद कोई विशेष सुधार देखने को नही मिला | मतलब साफ़ है - आजादी के साथ - साथ अच्छी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्कृति भी ज़रूरी है |
तेल की खोज से बदली किस्मत
20वीं सदी के आरंभ में वेनेजुएला में तेल का भंडार मिला, जिसने देश की अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम दिया | साल 1920 तक वेनेजुएला दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शुमार हो गया और तेल पर निर्भरता अधिक होने के कारण अन्य क्षेत्र विकास से वंचित रह गया | तेल ने वेनेजुएला को अमीर ज़रूर बनाया लेकिन साथ में भविष्य की चुनौतियों ने भी दस्तक दी |
वेनेजुएला के तानाशाह मार्कोस पेरेज जेमेनेज, जिन्होंने 1952 से 1958 तक देश की सत्ता संभाली और इनका शासन खत्म होने के बाद लोकतंत्र की शुरुआत हुई |
ह्यूगो चावेज का दौर
1999 में ह्यूगो चावेज देश के राष्ट्रपति बनें | इनके समाजवाद लागू करने से लोगों को खूब फायदा हुआ क्योंकि चावेज ने गरीबों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाएँ शुरू की और तेल उद्योग को सरकार में मिला लिया हालाँकि यहाँ तक तो स्थिति ठीक थी लेकिन जब निजी कंपनियों को अनदेखा किया जाने लगा और सरकारी नियंत्रण के कारण अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ती गई |
वेनेज़ुएला का वर्तमान
साल 2013 में ह्यूगो चावेज की मौत हुई और सत्ता में आए निकोलस मादुरो | सरकार की गलत नीतियाँ, तेल की कीमतों में भारी गिरावट, महंगाई चरम पर और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों ने वेनेजुएला को आर्थिक संकट में डाल दिया और लाखों नागरिक देश छोड़ कर चले गए | वर्तमान में वेनेज़ुएला की स्थिति आर्थिक रूप से कमजोर है और यहाँ के लोग कठिन हालात में जीवन गुजार रहे हैं |
निष्कर्ष
वेनेजुएला के इतिहास की सबसे बड़ी सीख ये है कि सिर्फ प्राकृतिक संसाधनों की बहुतायत किसी देश की सफलता की गारंटी नही होती | इसके लिए मजबूत संस्थाएँ, व्यवस्थित शासन और निर्णायक नीतियों का भी होना ज़रूरी है |
आदिवासी सभ्यता से शुरू होकर स्पेनिश शासन, आजादी की लड़ाई, तेल से मिला वैभव और वर्तमान की स्थिति तक वेनेजुएला की दास्तां संघर्ष और चेतावनी का मिश्रण है |

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