पाँच महान समाज सुधारक के बारे में

प्राचीन काल से ही भारत में अलग अलग प्रकार की कुप्रथाएं चली आ रही हैं और विभिन्न राजाओं द्वारा इसे खत्म करने का भी प्रयास किया गया। अंग्रेजों के समय पर भी इसका प्रभाव था लेकिन वो लोग इसे नजरअंदाज करके लाभ के कार्यों में ज्यादा ध्यान देते थे।

1 - राजा राम मोहन राय

राजा राम मोहन राय जिन्होंने देश के में प्रचलित कुप्रथाओं तथा अंधविश्वासों को हमेशा के लिए दूर कर दिया। राजा राम मोहन राय का जन्म 22 मई 1772 बंगाल में हुआ था। इनके पिता रमाकांत राय तथा माता तारिणी देवी थी। शिक्षा में वो अपने सहपाठियों की अपेक्षा अधिक तेज थे। फारसी और अरबी भाषा सीखने के लिए वो पटना चले गए। 


छोटी सी आयु में उन्होंने तिब्बत की यात्रा की। राजा राम मोहन राय की एक ही धारणा थी कि ईश्वर केवल एक है और वो ब्रम्हा है। सन् 1815 में इन्होंने आत्मीय सभा का गठन किया। इसमें कोई संदेह नहीं है कि राजा राम मोहन राय महान समाज सुधारक थे बल्कि वो हमेशा लोगों के हित में कार्य करते थे। सती प्रथा को राजा राम मोहन राय द्वारा प्रतिबंधित किया गया। इसके अलावा उन्होंने वेश्यावृत्ति, बहुविवाह, भेदभाव और छुआछूत को भी दूर किया।

2 - महात्मा गांधी

महात्मा गांधी एक विचारक, दार्शनिक, समाजशास्त्री और शिक्षाशास्त्री थे लेकिन वो एक महान समाज सुधारक भी थे। भारत की आजादी में सबसे बड़ा योगदान गांधी जी का रहा, जिसके बाद इन्हें राष्ट्रपिता की उपाधि सौंपी गई। गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था जिनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता करमचंद गांधी जो पोरबंदर रियासत के दीवान थे और माता पुतलीबाई थी।

गांधी जी ना तो पढ़ाई में तेज थे और ना ही खेल कूद में। इंग्लैंड से उन्होंने कानून की पढ़ाई की और सन् 1891 में बैरिस्टर की परीक्षा पास कर अपने स्वदेश आ गए। गांधी जी का विवाह 13 वर्ष की आयु में कस्तूरबा के साथ हो गया था। 1898 में वे दक्षिण अफ्रीका के लिए निकल पड़े और 1914 तक रहे। वहाँ पर उन्होंने रंग भेद नीति के विरुद्ध सत्याग्रह आंदोलन चलाया, इसके लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा।

दक्षिण अफ्रीका में एक कठिन संघर्ष के बाद गांधी जी 9 जनवरी 1915 को मुंबई आ गए। 1916 में गांधी जी भारतीय राजनीति से जुड़े। 1919 में ब्रिटिशों के विरुद्ध रौलेट एक्ट पास किया गया। 1920-1947 के बीच गांधी जी ने बहुत से आंदोलन चलाए जिनमें से असहयोग आंदोलन (1920-1922) सविनय अवज्ञा आंदोलन (1940-1941) और भारत छोड़ो आंदोलन (1942-1944) आदि प्रमुख है।



कई योजनाएं भी बनाई गई वेवल योजना, क्रिप्स योजना, मंत्रिमंडल मिशन योजना और माउंट बेटन योजना और अंत में माउंट बेटन योजना के आधार पर 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ और उसी समय अंग्रेजों ने देश का बंटवारा कर दिया जिससे पाकिस्तान नाम से दूसरा देश बना। हरिजनों को समानता प्राप्त कराने के लिए गांधी जी ने (मंदिर प्रवेश) कार्यक्रम को ज्यादा महत्व दिया।

स्वतंत्र भारत के संविधान में अछूत परंपरा को पूरी तरह से खत्म करने का श्रेय भी गांधी जी को जाता है। उनका मानना था कि अगर देश का निर्माण करना है और मजबूत बनाना है तो उसके लिए एकता बहुत जरूरी है। गांधी जी के बेहद कोशिशों के बावजूद ऐसा न हो सका और अंत में देश का विभाजन हो गया।

3 - मदर टेरेसा

मदर टेरेसा ने अपना सारा जीवन मानव सेवा में समर्पित कर दिया। तलाक के विरुद्ध उन्होंने आवाज उठाई। मानव कल्याण के लिए उन्होंने जो भी काम किया उसके लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया। 

मदर टेरेसा का जन्म युगोस्लाविया नामक स्थान पर 27 अगस्त 1970ई. में हुआ था। उनके पास भारतीय नागरिकता भी थी। सन् 1905 में मदर टेरेसा ने कोलकाता में मिशनरीज ऑफ चैरिटी का गठन किया। करीब 45 सालों तक गरीब, अनाथ और बीमार लोगों की मदद की और 18 साल की उम्र में मदर टेरेसा इंस्टीट्यूट ऑफ ब्लेसेड वर्जिन मेरी में शामिल होने के लिए आयरलैंड चली गई।



विकलांगों, नेत्रहीनों तथा कुष्ठरोगियों के लिए मदर टेरेसा द्वारा अनेक केंद्रों की स्थापना की गई। लोगों के हित में कार्य कर रही मदर टेरेसा को साल 1963 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया। निःस्वार्थ भाव से सेवा करने के लिए मदर टेरेसा को 1979 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया और 1980 में भारतीय सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न से नवाजा गया। 

मदर टेरेसा द्वारा स्थापित किया गया मिशनरीज ऑफ चैरिटी जिसमें एड्स से तपेदिक, कुष्ठ जैसे रोगियों के लिए धर्मशालाएं शामिल थे साथ ही अनाथालय और विद्यालय भी थे। 5 सितंबर 1997 को इस महान समाज सुधारक का निधन हो गया।

4 - भीमराव अंबेडकर

भारतीय संविधान के निर्माता एवं महान समाज सुधारक डा० भीमराव अंबेडकर जिनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश (महू) में हुआ था। सन् 1923 में अंबेडकर जी मुंबई से वकालत की शिक्षा लेना प्रारंभ किए और मूकनायक वह बहिष्कृत भारत नाम की दो पत्रिकाओं को प्रकाशित किया। इन्होंने अपनी शुरूआती पढ़ाई सतारा से तथा 10वीं की पढ़ाई एलिफिंस्टन स्कूल से की थी।

1927 में अंबेडकर जी बंबई विधान ऐ के सदस्य चुने गए और बंबई में सिद्धार्थ काॅलेज की स्थापना की। बंबई विधान परिषद के 140 स्थानों में 22 स्थान अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित करने की मांग की। संविधान निर्माता के रूप में उनकी भूमिका के कारण अंबेडकर जी को "आधुनिक मनु" कहा जाता है। भीमराव अंबेडकर जी का कहना था कि हिंदू धर्म में दया, सहिष्णुता और समानता के लिए कोई स्थान नहीं है इसलिए उन्होंने बौद्ध धर्म को अपनाने का फैसला किया।



66 वर्ष की आयु में 6 दिसंबर सन् 1956 को इनकी मृत्यु हो गई और बौद्ध धर्म के अनुसार ही उनका अंतिम संस्कार किया गया। 1990 में अंबेडकर जी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। डा० भीमराव अंबेडकर जी द्वारा किए गए कुछ अन्य कार्य-

1 दलितों के लिए आरक्षण की मांग

2 भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन

3 नागरिक अधिकारों का समर्थन

4 पाकिस्तान की मांग का समर्थन

5 जाति व्यवस्था में प्रमुख योगदान

6 छुआछूत के विरोध में समर्थन

अछूतों को पहले मंदिरों में जाने की इजाज़त नहीं थी लेकिन 2 मार्च 1930 में अंबेडकर जी के द्वारा चलाए गए आंदोलन से अछूतों को मंदिर में प्रवेश करने का अधिकार प्राप्त हुआ।

5 - किरण बेदी

भारत की पहली महिला आईपीएस ऑफिसर किरण बेदी का समाज सुधार में विशेष योगदान है। किरण बेदी का जन्म अमृतसर, पंजाब में सन् 1949 में हुआ था। किरण बेदी अपने कार्यकाल के दौरान अलग अलग पद पर रहते हुए अपने कार्य को बखूबी निभाया है। लाॅ की डिग्री के साथ ड्रग एब्यूज एंड डोमेस्टिक वायलेंस पर डाॅक्टरेट की उपाधि हासिल की है।



किरण बेदी ने इट्स ऑलवेज पाॅसिबल और आय डेयर नाम की पुस्तकें लिखी हैं। जेल सुधारों में भी इनका प्रमुख योगदान रहा है। उनके महान कार्यों के लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिले। इन्होंने दो सेवा संस्थानों की स्थापना की है पहला - नवज्योति और दूसरा - इंडिया विजन फाउंडेशन। जो अनाथ बच्चों के लिए रहने की व्यवस्था और शिक्षा प्रदान कराती है।

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