पाकिस्तान का इतिहास
पाकिस्तान जिसका अर्थ है 'पवित्र भूमि' जिसका इतिहास बहुत पुराना और विविध कहानियों से जुड़ा हुआ है। इसका इतिहास प्राचीन सभ्यताओं से लेकर आधुनिक काल तक विस्तृत है, इसके आलावा शक्तिशाली साम्राज्य और आधुनिक समय की चुनौतियाँ इसके इतिहास का हिस्सा हैं।
पाकिस्तान नाम का विचार साल 1933 में "PAKSTAN" के रूप में सामने आया, जो बाद में "PAKISTAN" बना, विकीपीडिया के अनुसार PAKSTAN शब्द का सृजन चौधरी रहमत अली ने किया था -- P - पंजाब
- A - अफगान
- K - कश्मीर
- S - सिंध
- TAN - बलूचिस्तान
ऐसी कई महत्वपूर्ण घटनाएँ हैं जो इसके इतिहास को लम्बा एवं जटिल बनाती हैं। तो चलिए जानते हैं इसके इतिहास के बारे में -
- P - पंजाब
- A - अफगान
- K - कश्मीर
- S - सिंध
- TAN - बलूचिस्तान
प्राचीन इतिहास
आज जिसे हम पाकिस्तान कहते हैं, वह क्षेत्र प्राचीन समय से ही सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान का केंद्र रहा है। यह इलाका हजारों साल पहले से ही इंसानों का घर था और यहां कई महान सभ्यताएँ फली-फूली हैं।
सिंधु घाटी सभ्यता – करीब 3300 ईसा पूर्व
यह पाकिस्तान का सबसे पुराना और दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। यह सभ्यता सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के आसपास फैली हुई थी।
इसके प्रमुख शहर थे:- मोहनजोदड़ो (अब पाकिस्तान में)
- हड़प्पा (पंजाब, पाकिस्तान में)
- चन्हुदड़ों, कोटदीजी आदि
इस सभ्यता की खास बातें:- पक्की ईंटों के मकान,
- अच्छी सड़कें और नालियां।
- लोग व्यापार करते थे, कपड़े बनाते थे, मिट्टी के बर्तन और मूर्तियाँ बनाते थे।
- लिपि (लिखने की भाषा) तो थी, लेकिन आज तक पढ़ी नहीं जा सकी है।
तक्षशिला और गांधार
सिन्धु सभ्यता के पतन के बाद ये क्षेत्र विभिन्न शासकों और संस्कृतियों का केंद्र बना।- तक्षशिला शिक्षा का प्रमुख केंद्र था, जहाँ बौद्ध धर्म और दर्शन का अध्ययन होता था।
- गांधार कला, स्थापत्य और बौद्ध धर्म के प्रसार के लिए विख्यात थी। बौद्ध धर्म चीन और मध्य एशियाई देशों का पहुँचा और गांधार कला शैली अधिक लोकप्रिय हुई।
आज का पाकिस्तान कभी सिर्फ रेगिस्तान या पहाड़ों की भूमि नहीं थी। यह वो धरती है जहाँ इंसान ने पहली बार शहर बसाए, व्यापार किया, धर्म और ज्ञान का विकास किया।
आज जिसे हम पाकिस्तान कहते हैं, वह क्षेत्र प्राचीन समय से ही सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान का केंद्र रहा है। यह इलाका हजारों साल पहले से ही इंसानों का घर था और यहां कई महान सभ्यताएँ फली-फूली हैं।
सिंधु घाटी सभ्यता – करीब 3300 ईसा पूर्व
यह पाकिस्तान का सबसे पुराना और दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। यह सभ्यता सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के आसपास फैली हुई थी।
इसके प्रमुख शहर थे:
- मोहनजोदड़ो (अब पाकिस्तान में)
- हड़प्पा (पंजाब, पाकिस्तान में)
- चन्हुदड़ों, कोटदीजी आदि
इस सभ्यता की खास बातें:
- पक्की ईंटों के मकान,
- अच्छी सड़कें और नालियां।
- लोग व्यापार करते थे, कपड़े बनाते थे, मिट्टी के बर्तन और मूर्तियाँ बनाते थे।
- लिपि (लिखने की भाषा) तो थी, लेकिन आज तक पढ़ी नहीं जा सकी है।
तक्षशिला और गांधार
सिन्धु सभ्यता के पतन के बाद ये क्षेत्र विभिन्न शासकों और संस्कृतियों का केंद्र बना।
- तक्षशिला शिक्षा का प्रमुख केंद्र था, जहाँ बौद्ध धर्म और दर्शन का अध्ययन होता था।
- गांधार कला, स्थापत्य और बौद्ध धर्म के प्रसार के लिए विख्यात थी। बौद्ध धर्म चीन और मध्य एशियाई देशों का पहुँचा और गांधार कला शैली अधिक लोकप्रिय हुई।
आज का पाकिस्तान कभी सिर्फ रेगिस्तान या पहाड़ों की भूमि नहीं थी। यह वो धरती है जहाँ इंसान ने पहली बार शहर बसाए, व्यापार किया, धर्म और ज्ञान का विकास किया।
मध्यकालीन इतिहास
मध्यकालीन इतिहास 8वीं सदी में शुरू होता है जब अरबों ने सिंध पर विजय प्राप्त की | मुस्लिम सेनापति मुहम्मद बिन क़ासिम ने 711 - 713 ई. के मध्य सिंध और आसपास के क्षेत्रों को जीतकर इस्लामी शासन की नींव रखी |
- इस्लाम का आगमन पाकिस्तान के क्षेत्र में सबसे पहले अरब आक्रमण के ज़रिए हुआ।
- मुहम्मद बिन क़ासिम का सिंध पर आक्रमण (711 ईस्वी)
- मोहम्मद बिन कासिम एक युवा अरब सेनापति था, जो उमय्यद ख़लीफा के अधीन था।
- उसने सिंध और मुल्तान पर हमला किया और राजा दाहिर को हराया।
- इस युद्ध के बाद इस्लाम पहली बार स्थायी रूप से सिंध क्षेत्र में फैला, जो आज का पाकिस्तान है।
- इस्लाम का आगमन पाकिस्तान के क्षेत्र में सबसे पहले अरब आक्रमण के ज़रिए हुआ।
- मुहम्मद बिन क़ासिम का सिंध पर आक्रमण (711 ईस्वी)
- मोहम्मद बिन कासिम एक युवा अरब सेनापति था, जो उमय्यद ख़लीफा के अधीन था।
- उसने सिंध और मुल्तान पर हमला किया और राजा दाहिर को हराया।
- इस युद्ध के बाद इस्लाम पहली बार स्थायी रूप से सिंध क्षेत्र में फैला, जो आज का पाकिस्तान है।
ग़ज़नवी और गौरी वंश (10वीं–12वीं सदी)
- महमूद ग़ज़नवी (1000–1030 ई.)
- अफगानिस्तान के ग़ज़नी से आया एक मुस्लिम शासक।
- उसने भारत पर 17 बार हमले किए।
- मुल्तान, लाहौर, और आसपास के क्षेत्रों पर कब्ज़ा किया।
- सोमनाथ मंदिर पर हमला भी प्रसिद्ध है।
- महमूद ग़ज़नवी (1000–1030 ई.)
- अफगानिस्तान के ग़ज़नी से आया एक मुस्लिम शासक।
- उसने भारत पर 17 बार हमले किए।
- मुल्तान, लाहौर, और आसपास के क्षेत्रों पर कब्ज़ा किया।
- सोमनाथ मंदिर पर हमला भी प्रसिद्ध है।
- ग़ज़नवी के बाद भारत में हमला करने वाला अगला प्रमुख मुस्लिम शासक मुहम्मद ग़ोरी (शहाबुद्दीन ग़ोरी)
- तराइन का युद्ध (1191-92) पृथ्वीराज चौहान से हुआ।
- विजय के बाद उसने दिल्ली और पंजाब तक अपना शासन फैलाया।
- ग़ज़नवी के बाद भारत में हमला करने वाला अगला प्रमुख मुस्लिम शासक मुहम्मद ग़ोरी (शहाबुद्दीन ग़ोरी)
- तराइन का युद्ध (1191-92) पृथ्वीराज चौहान से हुआ।
- विजय के बाद उसने दिल्ली और पंजाब तक अपना शासन फैलाया।
दिल्ली सल्तनत का प्रभाव (1206–1526)
दिल्ली सल्तनत भले ही दिल्ली में थी, लेकिन उसका प्रभाव आज के पाकिस्तान पर भी था।
प्रमुख सल्तनत - गुलाम वंश
- खिलजी वंश
- तुगलक वंश
- लोदी वंश
दिल्ली सल्तनत भले ही दिल्ली में थी, लेकिन उसका प्रभाव आज के पाकिस्तान पर भी था।
प्रमुख सल्तनत
- गुलाम वंश
- खिलजी वंश
- तुगलक वंश
- लोदी वंश
इस दौरान -
- लाहौर, मुल्तान, और सिंध दिल्ली सल्तनत के अधीन आ गए।
- इस्लामी शिक्षा, मदरसे, मस्जिदें, और सूफी संतों का आगमन हुआ।
- सूफी संतों ने शांति, प्रेम और भाईचारे का संदेश फैलाया।
- लाहौर, मुल्तान, और सिंध दिल्ली सल्तनत के अधीन आ गए।
- इस्लामी शिक्षा, मदरसे, मस्जिदें, और सूफी संतों का आगमन हुआ।
- सूफी संतों ने शांति, प्रेम और भाईचारे का संदेश फैलाया।
मुग़ल साम्राज्य का युग (1526–1707)
- बाबर से औरंगज़ेब तक
- बाबर, जिन्होंने पानीपत का पहला युद्ध (1526) जीता और मुग़ल साम्राज्य की नींव रखी।
- हुमायूं, अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ और औरंगज़ेब – सभी ने पाकिस्तान के इलाकों जैसे लाहौर, मुल्तान, पेशावर पर शासन किया |
- लाहौर – मुग़ल राजधानी
- जहाँगीर और नूरजहाँ का लाहौर से विशेष लगाव था।
- शालीमार बाग, बादशाही मस्जिद और लाहौर किला जैसे स्मारक इसी समय बने।
- बाबर से औरंगज़ेब तक
- बाबर, जिन्होंने पानीपत का पहला युद्ध (1526) जीता और मुग़ल साम्राज्य की नींव रखी।
- हुमायूं, अकबर, जहाँगीर, शाहजहाँ और औरंगज़ेब – सभी ने पाकिस्तान के इलाकों जैसे लाहौर, मुल्तान, पेशावर पर शासन किया |
- लाहौर – मुग़ल राजधानी
- जहाँगीर और नूरजहाँ का लाहौर से विशेष लगाव था।
- शालीमार बाग, बादशाही मस्जिद और लाहौर किला जैसे स्मारक इसी समय बने।
संस्कृति और कला:
मुग़लों के समय कला, वास्तुकला, संगीत और फारसी भाषा का बहुत विकास हुआ।लाहौर एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र बन गया।
मुग़लों के समय कला, वास्तुकला, संगीत और फारसी भाषा का बहुत विकास हुआ।
लाहौर एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र बन गया।
आधुनिक इतिहास
पाकिस्तान का विचार कैसे आया?
बीसवीं सदी की शुरुआत में भारतीय उपमहाद्वीप पर ब्रिटिश शासन था। भारत के हिंदू और मुस्लिम, दोनों ही अंग्रेजों से आज़ादी चाहते थे, लेकिन जैसे-जैसे आज़ादी की लड़ाई तेज हुई, मुस्लिम नेताओं को डर हुआ कि आज़ादी के बाद हिंदू बहुसंख्यक शासन में मुसलमानों को उनका अधिकार नहीं मिलेगा।
- अल्लामा इक़बाल, जो एक महान शायर और चिंतक थे, ने सबसे पहले 1930 में यह विचार रखा कि मुसलमानों को एक अलग देश मिलना चाहिए।
- इसके बाद मुहम्मद अली जिन्ना मुस्लिम लीग के नेता बने और उन्होंने "दो राष्ट्र सिद्धांत" को आगे बढ़ाया।
दो राष्ट्र सिद्धांत
मुस्लिम लीग का मानना था कि भारत में हिन्दू और मुस्लिम दो अलग - अलग समुदाय हैं, जिनकी संस्कृति और सामाजिक दृष्टिकोण अलग है, इसलिए स्वतंत्र और सुरक्षित रूप से अपने अधिकारों की रक्षा करने के लिए मुसलमानों को एक अलग देश की आवश्यकता है।
2. पाकिस्तान कैसे बना?
- 1940 – लाहौर प्रस्ताव
- मुस्लिम लीग ने लाहौर में यह प्रस्ताव पास किया कि मुस्लिम बहुल इलाकों को मिलाकर एक नया देश बनाया जाए। यहीं से पाकिस्तान के निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई।
- 1947 – भारत का विभाजन और पाकिस्तान का जन्म
- अंग्रेजों ने जब यह देखा कि हिंदू और मुस्लिम नेताओं में समझौता नहीं हो पा रहा है, तो उन्होंने भारत को दो भागों में बांटने का फैसला किया।
- 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान बना।
- 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।
पाकिस्तान दो भागों में था
- पश्चिम पाकिस्तान (आज का पाकिस्तान)
- पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश)
विभाजन की त्रासदी
- भारत-पाकिस्तान का विभाजन बहुत ही दर्दनाक और हिंसक था।
- करीब 10 लाख से ज्यादा लोग मारे गए।
- 1.5 करोड़ से ज्यादा लोग अपनी जमीन और घर छोड़ने पर मजबूर हुए।
- महिलाओं के साथ अत्याचार हुआ, बच्चे बिछड़ गए, हजारों परिवार टूट गए।
- यह उपमहाद्वीप के इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक थी।
पाकिस्तान का प्रारंभिक काल
14 अगस्त, 1947 को मुहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के पहले गवर्नर बनें और लियाकत अली खान को पाकिस्तान का पहला प्रधानमंत्री नामित किया गया। उस स्थिति में एक नए देश को चलाना आसान नही था और पाकिस्तान को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा - लाखों लोगों को शरण देना, कानून की व्यवस्था बनाना और पैसों की भारी कमी।
जिन्ना पाकिस्तान को एक ऐसा देश बनाना चाहते थे जहाँ सबको बराबरी और आज़ादी मिले, लेकिन 1948 में उनका निधन हो गया और देश को मजबूत सत्ता नही मिल पाई।
इसके बाद साल 1951 में रावलपिंडी के कंपनी बाग़ में अफ़ग़ान मूल के एक व्यक्ति द्वारा लियाकत अली खान की हत्या कर दी गई और इसी तरह सरकारें बार - बार बदलने से देश की राजनीति और कमजोर होती गई।
पाकिस्तान में सैन्य शासन
पाकिस्तान में पहले कमांडर इन चीफ जनरल फ्रैंक वाल्टर मेसर्वी (ब्रिटिश) थे। 1958 में पहली बार पाकिस्तान में सेना ने सत्ता अपने हाथ में ले ली और अयूब खान पहले पाकिस्तानी कमांडर इन चीफ थे। अयूब खान 1958 - 1969 तक देश के राष्ट्रपति रहे। इनके शासनकाल के दौरान साल 1965 में भारत - पाक युद्ध भी हुआ। इसके बाद उन्होंने मार्च, 1969 को राष्ट्रपति के पद से इस्तीफ़ा दे दिया और याह्या खान (1969 - 1971) सत्ता में आए।
1971 की लड़ाई और बांग्लादेश का जन्म
सत्ता परिवर्तन के साथ पूर्वी पाकिस्तान को लगने लगा कि उनके साथ भेदभाव हो रहा है और राजनीतिक असंतोष की स्थिति बनती गई, जिसके कारण पूर्वी पाकिस्तान के लोगों ने अलग देश बनाने की मांग की। 1971 भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ और अंत में पूर्वी पाकिस्तान अलग हो गया। एक नया देश बना बांग्लादेश।
3 बार बना देश का संविधान
- पाकिस्तान में पहला संविधान 1956 में लागू हुआ, जिसमें संसदीय प्रणाली अपनायी गई और ये पाकिस्तान को इस्लामी गणराज्य घोषित करने वाला पहला संविधान था।
- साल 1962, अयूब खान के शासनकाल में दूसरा संविधान बना, इसमें राष्ट्रपति को अधिक शक्तियाँ दी गई और ये संविधान अध्यक्षीय प्रणाली पर आधारित था।
- साल 1973, तीसरा और नया संविधान बना, जो संसदीय प्रणाली पर आधारित है। ये पाकिस्तान का वर्तमान संविधान है जिसमें प्रधानमंत्री प्रमुख होता है और संसद के दो सदन - नेशनल असेंबली और सेनेट होते हैं।
आधुनिक युग में लोकतंत्र की चुनौतियाँ
1973 में पाकिस्तान में नया संविधान लागू हुआ। इस दौरान कई नेता आए - जुल्फिकार अली भुट्टो, बेनजीर भुट्टो और नवाज़ शरीफ। कभी लोकतांत्रिक शासन स्थापित हुआ, तो कभी सेना ने सत्ता संभाली। इस वक़्त पाकिस्तान को लोकतंत्र से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा जैसे - आर्थिक मंदी, आतंकवाद और राजनीतिक विवाद।
28 मई, 1998 में पाकिस्तान दुनिया का सातवाँ और मुस्लिम देशों में पहला परमाणु शक्ति बना, जब उसने बलूचिस्तान के चगाई पहाड़ियों में अपना पहला परीक्षण किया।
निष्कर्ष
पाकिस्तान का इतिहास लोकतंत्र और सैन्य शासन के बीच संघर्ष की कहानी है। बार - बार होने वाले सत्ता परिवर्तन से देश में अस्थिरता बनी रही लेकिन हर बार इसने आगे बढ़ने की कोशिश की है। अब ये देश अपने इतिहास से क्या सीखता है, यही उसके भविष्य को तय करेगा।
अस्वीकरण
ये लेख केवल पढाई और जानकारी के लिए लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। ये किसी देश, समुदाय, धर्म या व्यक्ति के खिलाफ नही है। कृपया इसे इतिहास की जानकारी के रूप में ही देखें।

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