स्मार्टफोन की कीमतों में इतनी बढ़ोतरी कैसे?

कुछ साल पहले तक 15-20 हज़ार रुपए में एक बढ़िया स्मार्टफोन आसानी से मिल जाता था लेकिन अब वही फीचर्स वाले फोन खरीदने के लिए लोगों को 30-40 हज़ार रुपए या इससे भी ज्यादा खर्च करने पड़ रहे हैं। ऐसे में हर खरीदार के मन में एक सवाल आता है कि आखिर स्मार्टफोन इतने महंगे क्यों होते जा रहे हैं। क्या है वो ठोस वजह? आइए जानते हैं विस्तार से।


महंगे और उन्नत प्रोसेसर 

आज के स्मार्टफोन पहले की तुलना में काफी शक्तिशाली हो चुके हैं। इनके प्रोसेसर उच्च गुणवत्ता के होते हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 4k और 8k वीडियो रिकॉर्डिंग और हाई एंड गेमिंग जैसे जटिल कार्यों को आसानी से संभाल सकते हैं।

कैमरा तकनीक में हुआ बदलाव 

पहले के स्मार्टफोन एक या दो कैमरे के साथ आते थे। वहीं आज कई फोन में 50MP, 108MP या इससे भी ज्यादा क्षमता वाले कैमरे, अल्ट्रा वाइड और  मैक्रो लेंस जैसे फीचर्स दिए जाते हैं। ये तो कुछ भी नहीं है, इन सबके अलावा ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन, नाइट फोटोग्राफी और बेहतर सेंसर जैसी खास तकनीकों का प्रयोग किया जाता है।

और जब ऐसे खास और महंगी तकनीकों का इस्तेमाल होता है तो फोन की कीमत भी बढ़ जाती है।

5G तकनीक की अहम भूमिका 

दुनिया के अधिकांश नए स्मार्टफोन 5G नेटवर्क से चलते हैं और इस तकनीक के इस्तेमाल की लागत भी काफी महंगी है। इसके लिए विशेष माॅडेम, एंटीना लगाया जाता है। जितनी भी नई तकनीकें आती हैं उसके लिए कंपनी को अनुसंधान और विकास में भारी निवेश भी करना पड़ता है।


महंगी डिस्पले और निर्माण सामग्री 

आज का स्मार्टफोन AMOLED, OLED, LTPO जैसी आधुनिक डिस्पले तकनीकों से लैस है। डिस्पले में रंग, ज्यादा ब्राइटनेस, बिजली की बचत और 
120hz रिफ्रेश रेट मिलती है। कई कंपनियां स्मार्टफोन को बनाने में एल्यूमिनियम फ्रेम, सिरेमिक बाॅडी और मजबूत ग्लास का उपयोग करती हैं। कुछ माॅडल्स में पानी और धूल से सुरक्षा भी दी जाती है। 

स्मार्टफोन बनाने के लिए अलग-अलग तरह के पुर्जों की जरूरत पड़ती है और अगर इनकी कीमतें बढ़ती हैं तो पूरे फोन के निर्माण की लागत बढ़ सकती है।

तो जिन फोन में प्रीमियम डिस्पले होती है और सामग्रियों की लागत ज्यादा होती है, उनकी क़ीमत भी अधिक होती है।


अनुसंधान और विकास भी है वजह 


हर नया स्मार्टफोन बाजार में आने से पहले एक विशेष परीक्षण की प्रक्रिया से गुजरता है। बैटरी, नेटवर्क, साॅफ्टवेयर, कैमरा और एआई फीचर्स पर लगातार काम होता है और इस प्रक्रिया पर अरबों रुपए खर्च किए जाते हैं।

इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं पर अलग अलग कर और आयात शुल्क लगाए जाते हैं, जो फोन के अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। नवभारत टाइम्स के अनुसार - OnePlus फोन अपने लाॅन्च प्राइस से 12,000 रुपए महंगा हो चुका है।


कुछ बड़ी कंपनियां कई वर्षों के लिए एंड्रॉयड और सुरक्षा अपडेट देने का दावा करती हैं और इतने लंबे समय तक साॅफ्टवेयर विकसित करना और अपडेट उपलब्ध कराना भारी लागत की श्रेणी में आता है।

क्या ये महंगाई भविष्य में जारी रहेगी?

कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, अगर एआई फीचर्स, डिस्पले तकनीक शक्तिशाली चिप्स का इस्तेमाल होता रहा तो कीमत आसमान छूती रहेगी। लेकिन अगर भारत में स्मार्टफोन अधिक बनने लगे और कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़े तो मध्यम बजट वाले फोन की कीमतें कम हो सकती हैं।

महंगे फोन उन लोगों के लिए जरूरी है जिनका काम प्रोफेशनल है जैसे - गेमिंग, वीडियो एडिटिंग और मध्यम कीमत वाले फोन पढ़ाई, सोशल मीडिया और फोटोग्राफी के लिए पर्याप्त होते हैं। इसलिए फोन खरीदते समय कीमत नहीं बल्कि अपनी जरूरतों को ध्यान में रखना चाहिए।

सही जानकारी के आधार पर लिया गया निर्णय बेहतर खरीद साबित होता है।




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