आईपीएस ऑफिसर किरण बेदी की कहानी

भारत की प्रथम महिला आईपीएस ऑफिसर किरण बेदी जो अपने दम पर एक आईपीएस ऑफिसर बनी और समाज में एक बड़ा बदलाव लाई। एक समय था जब महिलाओं पर पुरुषों का दबदबा रहता था और उन पर अत्याचार भी होते थे। ऐसी परिस्थिति में किरण बेदी ने खुद को ऐसी जगह पे लाकर खड़ा कर दिया जहाँ पर शायद ही ऐसी परिस्थिति में कोई पहुँच सकता है।


जन्म/स्थान - 9 जून,1949 (अमृतसर, पंजाब)

पिता - प्रकाश लाल पेशावरिया

माता - प्रेमलता

बहन - अनु, रीता (टेनिस खिलाड़ी)

पति - बृज बेदी (टेनिस खिलाड़ी)

शिक्षा - अंग्रेजी ऑनर्स में ग्रेजुएट

         -  राजनीति विज्ञान में एम.ए

         -  लाॅ की डिग्री (दिल्ली विश्वविद्यालय)

         -  सामाजिक विज्ञान में पी.एच.डी 

किरण बेदी - भारत की प्रथम महिला आईपीएस ऑफिसर। इनके पिता कपड़ों का व्यापार करते थे और वो एक टेनिस खिलाड़ी भी थे जिनसे किरण भी टेनिस सीखती थी।

किरण बेदी की प्रारंभिक शिक्षा

किरण बेदी ने अपनी पढ़ाई सेक्रेड हार्ट काॅन्वेंट स्कूल (अमृतसर) से की और वहीं पर उन्होंने NCC को भी ज्वाइन कर लिया। इसके बाद सन् 1968 में उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वुमन (अमृतसर) से अंग्रेजी ऑनर्स में स्नातक की डिग्री ली और सन् 1970 में पंजाब विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एम.ए की डिग्री ली।

1988 के दौरान उन्होंने लाॅ की पढ़ाई दिल्ली से पूरी की और 1993 में IIT दिल्ली से सामाजिक विज्ञान में पी.एच.डी की।

जब किरण 9 साल की थी तभी से वो टेनिस का अभ्यास कर रहीं थी। सन् 1964 में किरण एक टेनिस खिलाड़ी बनकर अपने करियर को आगे लेकर गई। वहीं साल 1966 में किरण जूनियर नेशनल लाॅन टेनिस चैंपियनशिप जीती और 1968 में किरण आल इंडिया इंटरवेर्सिटी टेनिस टाईटल का खिताब भी जीती।

1973 में श्रीलंका के खिलाफ खेलकर लियोनेल फोंसेका मेमोरियल ट्राॅफी भी अपने नाम कर चुकी हैं। साथ ही 1975 में अखिल भारतीय अंतरराष्ट्रीय महिला लाॅन टेनिस में विजय प्राप्त की। इसके अलावा 1976 में नेशनल वुमेन्स लाॅन टेनिस चैंपियनशिप में भी जीती। टेनिस खेलना किरण का एक शौक था जिसमें वो सफल भी हुई।


किरण बेदी का वैवाहिक जीवन

9 मार्च, 1972 में बृज बेदी (टेनिस खिलाड़ी) जिनके साथ किरण बेदी की शादी हुई। किरण और बृज की मुलाकात भी पहली बार टेनिस कोर्ट में हुई थी। जहाँ पर दोनों की दोस्ती हुई और दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। 

साल 1975 में उन्हें एक बेटी भी हुई जिसका नाम उन्होंने सायना रखा। दुर्भाग्यवश सन् 2016 में कैंसर के कारण उनके पति की मौत हो जाती है।

सिविल सर्विस : किरण बेदी

साल 1972 में किरण बेदी देश की प्रथम महिला आईपीएस ऑफिसर बनी। आईपीएस को क्लियर करने के बाद किरण ने कुछ महीनों तक माउंट आबू (राजस्थान) में ट्रेनिंग ली। 1975 में इनकी पहली पोस्टिंग चाणक्यपुरी पुलिस स्टेशन (दिल्ली) में हुई थी जहाँ पर ये एक उप-मंडल पुलिस अधिकारी के पद पर थी।

सन् 1979 में किरण की पोस्टिंग पश्चिमी दिल्ली में एक डी.सी.पी के तौर पर हुई। अपराधियों को नियंत्रित करने के लिए वहाँ पर वहाँ पर उनके साथ कई फोर्स भी थी। क्रेन की शुरुआत भी किरण बेदी ने ही की ‌थी, जिस वजह से उन्हें क्रेन बेदी भी कहा जाता था। सबसे बड़ी बात ये थी कि एजीएमयूटी कैडर में वो 80 पुरूषों में इकलौती महिला पुलिस ऑफिसर थी।

किरण बेदी हमारे देश की बेटियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा हैं। 1983 में किरण बेदी गोवा में एक ट्रैफिक एसपी के पद पर काम करने लगी और ठीक एक साल बाद 1984 में रेलवे सुरक्षा बल (नई दिल्ली) में उप-कमांडंट के पद पर नियुक्त की गई। किरण बेदी ने अपने कार्यों को बखूबी निभाया और अत्यधिक सम्मान भी मिला।


1986 में उत्तरी दिल्ली में डी.एस.पी 

1988 में दिल्ली की उपनिदेशक और N.C.B में काम की।

1990 में मिजोरम में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल

1993 में दिल्ली की आइजी के पद पर

आपको बता दें कि किरण बेदी की अंतिम पोस्टिंग सन् 2005 में डायरेक्टर जनरल ऑफ इंडिया ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट में हुई और सन् 2007 में किरण बेदी अपने पद से यानी पुलिस सेवा से इस्तीफा दे देती हैं।

राजनीति से जुड़ी हुई किरण बेदी

सन् 2015 में किरण बी.जे.पी में शामिल हुई और सन् 2015 में ही दिल्ली विधानसभा चुनाव में बी.जे.पी की तरफ से मुख्यमंत्री का चुनाव भी लड़ी थी। 22 मई सन् 2016 में किरण बेदी को पुडुचेरी में लेफ्टिनेंट गवर्नर का पद मिला। साथ ही सन् 2001 में अन्ना हजारे द्वारा चलाया गया India Against Corruption में भी शामिल हुई। महिलाओं के लिए उनकी शिक्षा के लिए उन्होंने एक Non government organization भी लांच किया जिसका नाम उन्होंने रखा Navjyoti India Foundation.



भारत की प्रथम महिला आईपीएस ऑफिसर जिन्होंने भारत की महिलाओं के लिए बड़ा योगदान दिया है और भी क्षेत्रों में उनका नाम है। आशा करते हैं कि जो भी अपने जीवन में कुछ हासिल करना चाहते हैं वो कुछ बड़ा हासिल करें जिससे आने वाली पीढियां आपकी सफलता से प्रेरित हों।

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